PM Surya Ghar Yojana 2026: पूरीगाइड — सब्सिडी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया

बिजली का बिल हर महीने बढ़ता जा रहा है — क्या आप जानते हैं कि सरकार आपके घर की छत को कमाई का जरिया बनाने के लिए ₹78,000 तक की सीधी सब्सिडी दे रही है?

अगर आप हर महीने बिजली का बिल देखकर परेशान हो जाते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही लिखा गया है। कल्पना करें — आपके घर की छत पर सोलर पैनल लगे हैं, मीटर उल्टा घूम रहा है, और महीने के अंत में बिजली का बिल जीरो आ रहा है। यह कोई सपना नहीं, बल्कि भारत सरकार की PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत लाखों परिवारों की हकीकत बन चुका है।

13 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत की थी, और आज 2026 में यह भारत की सबसे बड़ी रूफटॉप सोलर स्कीम बन चुकी है। सरकार का लक्ष्य है — एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना और हर परिवार को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए सरकार सीधे आपके बैंक खाते में ₹78,000 तक की सब्सिडी भेजती है — बिना किसी बिचौलिये के।

इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि PM Surya Ghar Yojana क्या है, इसके लिए कौन पात्र है, सब्सिडी कैसे कैलकुलेट होती है, आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या है, और आवेदन रिजेक्ट होने से कैसे बचें। अगर आप अपने घर की बिजली का बिल हमेशा के लिए कम या खत्म करना चाहते हैं, तो इस गाइड को अंत तक पढ़ें — इसमें हर वो जानकारी है जो आपको चाहिए।

PM Surya Ghar Yojana क्या है?

PM Surya Ghar: Muft Bijli Yojana भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा चलाई जा रही एक केंद्रीय योजना है, जिसका मकसद देश के आवासीय घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत पात्र परिवार अपनी छत पर 1 से 3 किलोवाट या इससे बड़ा सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं, और सरकार इसकी लागत का बड़ा हिस्सा सब्सिडी के रूप में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर करती है।

इस योजना का कुल बजट ₹75,021 करोड़ रखा गया है, जो इसे भारत की सबसे बड़ी रूफटॉप सोलर योजना बनाता है। 2026 के मध्य तक 40 लाख से ज्यादा घरों में सोलर सिस्टम लग चुके हैं और सरकार ने ₹22,750 करोड़ से अधिक की केंद्रीय सहायता (Central Financial Assistance) बांट दी है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 75 लाख घरों तक इस योजना को पहुंचाना है।

एक नज़र में योजना
▸ शुरुआत: 13 फरवरी 2024
▸ लक्ष्य: 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर
▸ कुल बजट: ₹75,021 करोड़
▸ अधिकतम सब्सिडी: ₹78,000 प्रति घर (सामान्य राज्यों में)
▸ मुफ्त बिजली: हर महीने 300 यूनिट तक
▸ आवेदन: पूरी तरह ऑनलाइन — pmsuryaghar.gov.in
▸ हेल्पलाइन: 15555 (टोल-फ्री)

यह योजना आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में बिजली की दरें हर साल बढ़ रही हैं, और मिडिल क्लास परिवारों के मासिक बजट का बड़ा हिस्सा बिजली के बिल में चला जाता है। PM Surya Ghar Yojana सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं है — यह आपकी आर्थिक स्वतंत्रता की तरफ एक ठोस कदम है। एक बार सिस्टम लग जाने के बाद, आप 25 साल से ज्यादा समय तक मुफ्त या बहुत सस्ती बिजली पा सकते हैं।

इस योजना के पीछे तीन बड़े मकसद हैं:

  • आम आदमी के बिजली बिल में कमी लाना और घरेलू बजट को राहत देना।
  • जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाकर भारत के नेट-ज़ीरो लक्ष्य को आगे बढ़ाना।
  • सोलर इंस्टॉलेशन, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करना।

अगर आप विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के पाठक हैं और भारत में अपने माता-पिता या परिवार के घर के लिए यह सब्सिडी दिलवाना चाहते हैं, तो यह जानकारी उतनी ही उपयोगी है — क्योंकि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और परिवार का कोई भी सदस्य भारत में बैठे-बैठे इसे पूरा कर सकता है।

PM Surya Ghar Yojana के मुख्य फायदे

1. सीधी नकद सब्सिडी

सब्सिडी की राशि सीधे आपके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए आती है — किसी एजेंट या बिचौलिये की जरूरत नहीं।

2. हर महीने मुफ्त बिजली

सही आकार का सिस्टम लगवाने पर औसत परिवार हर महीने 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त पा सकता है, जिससे बिजली का बिल लगभग जीरो हो जाता है।

3. सस्ता सोलर लोन

SBI, PNB और Canara Bank जैसे बैंक इस योजना के लाभार्थियों को रियायती ब्याज दरों पर लोन देते हैं — SBI की दर करीब 7.25% प्रति वर्ष से शुरू होती है, जिससे बचा हुआ खर्च भी आसान EMI में बदल जाता है।

4. 25 साल की लंबी बचत

एक बार लगने के बाद सोलर पैनल औसतन 25 साल तक चलते हैं। शुरुआती निवेश 2-4 साल में वसूल हो जाता है, और उसके बाद लगभग पूरी बिजली मुफ्त मिलती है।

5. पर्यावरण के लिए योगदान

हर सोलर यूनिट कार्बन उत्सर्जन कम करती है। एक 3 kW सिस्टम सालाना लगभग 3-4 टन कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करता है।

6. विशेष राज्यों को अतिरिक्त लाभ

पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी राज्यों (स्पेशल कैटेगरी स्टेट्स) में सब्सिडी बढ़कर ₹1,17,000 तक भी जा सकती है, ताकि इन क्षेत्रों में सोलर अपनाना आसान हो।

सब्सिडी कैसे कैलकुलेट होती है?

सब्सिडी की गणना आपके सिस्टम के साइज़ (किलोवाट में) पर निर्भर करती है। पहले 2 kW के लिए ₹30,000 प्रति kW, और तीसरे kW के लिए ₹18,000 मिलते हैं। 3 kW या उससे बड़े सिस्टम पर सब्सिडी ₹78,000 पर कैप हो जाती है — यानी 5 kW या 10 kW का सिस्टम लगाने पर भी सब्सिडी नहीं बढ़ती।

सिस्टम साइज़सब्सिडी की गणनाकुल सब्सिडी (लगभग)
1 kW₹30,000 प्रति kW₹30,000
2 kW₹30,000 x 2₹60,000
3 kW या अधिक₹60,000 + ₹18,000 (कैप)₹78,000 (अधिकतम)
विशेष राज्य (NE/पहाड़ी)उच्च स्लैब लागू₹1,17,000 तक

ध्यान रखें: यह केंद्र सरकार की सब्सिडी है। कई राज्य — जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान — इसके ऊपर अपना अलग राज्य-स्तरीय टॉप-अप भी देते हैं, जिससे कुल बचत और बढ़ जाती है। अपने राज्य की नोडल एजेंसी की वेबसाइट पर यह जानकारी जरूर जांचें।

PM Surya Ghar Yojana कैसे काम करती है?

यह योजना नेट-मीटरिंग सिस्टम पर आधारित है। आपकी छत पर लगा सोलर पैनल दिन में बिजली बनाता है — जितनी बिजली आप इस्तेमाल नहीं करते, वह ग्रिड में वापस चली जाती है और आपके नेट मीटर में क्रेडिट हो जाती है। रात में जब सोलर बिजली नहीं बनती, तो आप यही क्रेडिट इस्तेमाल करते हैं। महीने के अंत में सिर्फ नेट (शुद्ध) खपत का बिल आता है — इसलिए इसे ‘नेट मीटरिंग’ कहा जाता है।

पूरी प्रक्रिया पांच बड़े चरणों में बंटी है — रजिस्ट्रेशन, DISCOM से फीज़िबिलिटी अप्रूवल, इंस्टॉलेशन, नेट मीटर व इंस्पेक्शन, और अंत में सब्सिडी का DBT ट्रांसफर। पूरी यात्रा में सामान्यतः 45 से 90 दिन लगते हैं, हालांकि गुजरात जैसे राज्यों में UGVCL जैसी कुछ DISCOM कंपनियां इसे 45-65 दिन में भी पूरा कर देती हैं।

पात्रता की शर्तें

इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • आवेदक के नाम पर घर हो और छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त और छायामुक्त जगह हो।
  • घर में वैध और सक्रिय बिजली कनेक्शन होना चाहिए (कोई बकाया बिल न हो)।
  • बिजली कनेक्शन का सैंक्शन्ड लोड 10 kW या उससे कम होना चाहिए।
  • आवेदक ने पहले किसी अन्य सरकारी योजना के तहत सोलर सब्सिडी न ली हो।
  • बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए, ताकि DBT सीधे खाते में आ सके।

जरूरी दस्तावेज़

  • आधार कार्ड
  • नवीनतम बिजली बिल (कंज़्यूमर नंबर सहित)
  • घर के स्वामित्व/पते का प्रमाण
  • बैंक पासबुक या कैंसल चेक
  • पासपोर्ट साइज़ फोटो
  • मोबाइल नंबर (OTP वेरिफिकेशन के लिए, आधार से लिंक होना बेहतर)

स्टेपबायस्टेप आवेदन गाइड

नीचे दी गई प्रक्रिया को हम ‘5-स्टेज सूर्यघर फनल’ कहते हैं — रजिस्ट्रेशन से लेकर बैंक खाते में सब्सिडी आने तक। दस्तावेज़ तैयार हों तो सिर्फ रजिस्ट्रेशन में 20-30 मिनट लगते हैं।

  1. pmsuryaghar.gov.in पर जाएं और होमपेज पर ‘Apply for Rooftop Solar‘ पर क्लिक करें।
  2. अपना राज्य और DISCOM (बिजली वितरण कंपनी) चुनें, फिर बिजली बिल पर लिखा कंज़्यूमर नंबर डालें।
  3. मोबाइल नंबर पर OTP से वेरिफिकेशन करके अकाउंट बनाएं।
  4. नाम, पता, आधार नंबर और बैंक डिटेल जैसी पर्सनल जानकारी भरें — ध्यान रहे, यह जानकारी बिजली बिल और आधार से एक-दम मेल खाना चाहिए।
  5. जरूरी दस्तावेज़ अपलोड करें — बिजली बिल, आधार कॉपी, पासपोर्ट फोटो — और आवेदन सबमिट करें।
  6. सबमिशन के बाद SMS पर Application Reference Number (ARN) मिलेगा। इसे सुरक्षित रखें, यही आगे की पूरी ट्रैकिंग का आधार है।
  7. DISCOM आपकी छत और ट्रांसफार्मर क्षमता की फीज़िबिलिटी जांच करेगा — इसमें सामान्यतः 7 से 30 दिन लगते हैं।
  8. फीज़िबिलिटी अप्रूवल मिलने के बाद, पोर्टल पर लिस्टेड किसी भी MNRE-एम्पैनल्ड (रजिस्टर्ड) वेंडर को चुनें और सोलर सिस्टम इंस्टॉल करवाएं। ध्यान दें कि पैनल और इनवर्टर ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल होने चाहिए।
  9. इंस्टॉलेशन के बाद पोर्टल पर प्लांट की डिटेल भरें और नेट मीटर के लिए आवेदन करें।
  10. DISCOM नेट मीटर लगाएगा और इंस्पेक्शन करेगा — इसमें 7 से 12 दिन तक लग सकते हैं।
  11. इंस्पेक्शन पास होने पर पोर्टल कमीशनिंग सर्टिफिकेट जनरेट करेगा।
  12. अंत में बैंक खाता वेरिफाई करें — इसके बाद सब्सिडी सामान्यतः 30 से 45 दिन में सीधे आपके बैंक खाते में जमा हो जाती है।

Best Practices — सफल आवेदन के लिए सुझाव

  • आवेदन शुरू करने से पहले सभी दस्तावेज़ों में नाम की स्पेलिंग को आधार, बिजली बिल और बैंक खाते में एक जैसा रखें।
  • अपने बिजली बिल में कोई बकाया राशि (arrears) न हो, यह पहले क्लियर कर लें।
  • सिर्फ पोर्टल पर लिस्टेड ALMM-प्रमाणित उपकरण और MNRE-एम्पैनल्ड वेंडर से ही इंस्टॉलेशन करवाएं।
  • सिस्टम का साइज़ अपनी औसत मासिक बिजली खपत के अनुसार चुनें — जरूरत से बड़ा सिस्टम लगाने से सब्सिडी नहीं बढ़ती, सिर्फ रिटर्न कम होता है।
  • हर 10-15 दिन में पोर्टल पर लॉगिन करके एप्लीकेशन स्टेटस चेक करते रहें, ताकि कोई पेंडिंग एक्शन छूट न जाए।
  • ARN नंबर और सभी रसीदों के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें — किसी भी विवाद की स्थिति में यह सबूत के तौर पर काम आते हैं।

उदाहरण और केस स्टडी

उदाहरण 1: छोटा परिवार, 2 kW सिस्टम

मान लीजिए रीना जी का परिवार दिल्ली में रहता है और उनका औसत मासिक बिजली बिल ₹1,800 आता है। उन्होंने 2 kW का सिस्टम लगवाया, जिसकी लागत करीब ₹1,20,000 थी। उन्हें ₹60,000 की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिली, यानी असली खर्च सिर्फ ₹60,000 रहा। महीने की बिजली खपत के अनुसार, उनका बिल घटकर लगभग ₹200-300 प्रति माह रह गया — निवेश करीब 3.5 साल में वसूल हो गया।

उदाहरण 2: बड़ा परिवार, 3 kW सिस्टम

उत्तर गुजरात के एक परिवार ने UGVCL DISCOM क्षेत्र में 3 kW सिस्टम लगवाया। वहां फीज़िबिलिटी अप्रूवल सिर्फ 7-14 दिन में मिल गया, क्योंकि यह DISCOM सोलर आवेदनों को तेज़ी से प्रोसेस करने के लिए जाना जाता है। अधिकतम ₹78,000 की सब्सिडी मिलने के बाद, DBT ट्रांसफर सिर्फ 30 दिन के भीतर पूरा हो गया — यानी कुल प्रक्रिया 45-65 दिन में निपट गई।

उदाहरण 3: सब्सिडी में देरी का मामला

तमिलनाडु के एक आवेदक का बिजली बिल उनके पिता के नाम पर था, जबकि बैंक खाता उनके खुद के नाम पर था। पोर्टल ने नाम मिसमैच के कारण एप्लीकेशन रोक दिया। सुधार के बाद उन्होंने बिजली कनेक्शन अपने नाम ट्रांसफर करवाया या फिर बैंक खाता पिता के नाम से खोला, दोबारा आवेदन किया, और मामला सुलझ गया। यह दिखाता है कि दस्तावेज़ों में नाम का मेल कितना जरूरी है।

एक्सपर्ट टिप्स

  • सिस्टम साइज़ तय करने से पहले पिछले 12 महीनों के बिजली बिल का औसत निकालें — यही सही साइज़िंग की कुंजी है।
  • अपने इलाके की धूप (peak sun hours) को ध्यान में रखें; ज्यादा सनशाइन वाले राज्यों में छोटा सिस्टम भी बेहतर आउटपुट देता है।
  • अगर बजट सीमित है, तो SBI, PNB या Canara Bank के रियायती सोलर लोन का इस्तेमाल करें — ब्याज दर सामान्य पर्सनल लोन से काफी कम होती है।
  • वेंडर चुनते समय सिर्फ पोर्टल पर लिस्टेड नाम पर भरोसा करें, सोशल मीडिया विज्ञापन या अनजान एजेंट से सावधान रहें।
  • इंस्टॉलेशन के बाद सालाना एक बार पैनल की सफाई और इनवर्टर की जांच करवाएं, ताकि आउटपुट बना रहे।

सामान्य गलतियां जिनसे बचें

देशभर में लगभग एक-तिहाई आवेदन किसी न किसी वजह से शुरुआत में रिजेक्ट या पेंडिंग हो जाते हैं। सबसे सामान्य कारण नीचे दिए गए हैं:

  • आधार, बिजली बिल और बैंक खाते में नाम का मेल न होना — सबसे बड़ी वजह।
  • गलत कंज़्यूमर नंबर दर्ज करना।
  • बिजली बिल पर बकाया राशि (arrears) होना।
  • तकनीकी रूप से अनुपयुक्त छत — जगह कम होना या ट्रांसफार्मर क्षमता सीमित होना।
  • गैर-एम्पैनल्ड (अनरजिस्टर्ड) वेंडर से इंस्टॉलेशन करवाना, जिससे कमीशनिंग रिपोर्ट अमान्य हो जाती है।
  • ALMM लिस्ट में शामिल न होने वाले पैनल/इनवर्टर का इस्तेमाल करना।
  • बैंक खाता आधार से लिंक न होना, जिससे DBT फेल हो जाता है।

अगर आवेदन रिजेक्ट हो जाए, तो घबराएं नहीं। पोर्टल पर लॉगिन करके रिजेक्शन का सही कारण देखें, जिस चीज़ पर ‘फ्लैग’ लगा है सिर्फ उसे ठीक करें, और दोबारा सबमिट करें। समस्या 30 दिन में हल न हो तो 15555 पर कॉल करें या अपने राज्य के बिजली नियामक आयोग (SERC) में शिकायत दर्ज करें।

फायदे और नुकसान

फायदे (Advantages)नुकसान (Disadvantages)
₹78,000 तक सीधी सब्सिडी बैंक खाते मेंशुरुआती कागज़ी प्रक्रिया में समय लगता है (45-90 दिन)
25 साल तक की लंबी अवधि की बचतछत की उपयुक्त जगह और मजबूती जरूरी
25 साल तक बिजली बिल लगभग जीरोएक-तिहाई आवेदन दस्तावेज़ी गलतियों से रुक जाते हैं
रियायती ब्याज दर पर सोलर लोन उपलब्ध3 kW से ऊपर सब्सिडी नहीं बढ़ती (₹78,000 पर कैप)
पर्यावरण को सीधा लाभ, कार्बन उत्सर्जन कमसिर्फ MNRE-एम्पैनल्ड वेंडर से ही इंस्टॉलेशन मान्य
100% ऑनलाइन प्रक्रिया, बिचौलिये की जरूरत नहींDISCOM की गति के अनुसार राज्य-दर-राज्य टाइमलाइन अलग

नवीनतम ट्रेंड्स और अपडेट्स (2026)

  • मई 2026 तक 40 लाख से ज्यादा घरों में सोलर सिस्टम कमीशन हो चुके हैं, और सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक 75 लाख घरों तक पहुंचना है।
  • योजना शुरू होने के 18 महीनों के भीतर 1.5 करोड़ से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।
  • 2026-27 के बजट में योजना के लिए करीब ₹22,000 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि आवंटित की गई है।
  • उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्य केंद्रीय सब्सिडी के ऊपर अपना राज्य-स्तरीय टॉप-अप दे रहे हैं।
  • पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में विशेष श्रेणी के तहत सब्सिडी ₹1,17,000 तक बढ़ाई गई है।
  • गुजरात की UGVCL जैसी कुछ DISCOM कंपनियां अब 45-65 दिन में पूरी प्रक्रिया पूरी कर रही हैं, जो राष्ट्रीय औसत से तेज़ है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

PM Surya Ghar Yojana के लिए अधिकतम सब्सिडी कितनी है?

सामान्य राज्यों में अधिकतम सब्सिडी ₹78,000 है (3 kW या उससे बड़े सिस्टम के लिए)। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों जैसे विशेष श्रेणी क्षेत्रों में यह ₹1,17,000 तक जा सकती है।

आवेदन कहां और कैसे करें?

आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है — pmsuryaghar.gov.in पर जाकर ‘Apply for Rooftop Solar‘ पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें।

सब्सिडी बैंक खाते में आने में कितना समय लगता है?

DISCOM इंस्पेक्शन पास होने और नेट मीटर लगने के बाद सामान्यतः 30-45 दिन में DBT के जरिए सब्सिडी खाते में आ जाती है।

क्या किराए के घर में रहने वाले भी आवेदन कर सकते हैं?

नहीं, आवेदक के पास घर का स्वामित्व और छत पर पैनल लगाने का अधिकार होना चाहिए।

सैंक्शन्ड लोड की सीमा क्या है?

आवेदक के बिजली कनेक्शन का सैंक्शन्ड लोड 10 kW या उससे कम होना चाहिए।

क्या सोलर लोन भी उपलब्ध है?

हां, SBI, PNB और Canara Bank जैसे बैंक रियायती ब्याज दरों पर सोलर लोन देते हैं; SBI की दर करीब 7.25% प्रति वर्ष से शुरू होती है।

आवेदन रिजेक्ट होने पर क्या करें?

पोर्टल पर रिजेक्शन का कारण देखें, संबंधित दस्तावेज़ ठीक करें और दोबारा सबमिट करें। समस्या न सुलझे तो 15555 पर कॉल करें।

ALMM लिस्ट क्या है और यह जरूरी क्यों है?

ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सोलर पैनल और इनवर्टर निर्माताओं की सूची है। इस लिस्ट के बाहर के उपकरण लगाने पर सब्सिडी रिजेक्ट हो सकती है।

3 kW से बड़ा सिस्टम लगाने पर क्या ज्यादा सब्सिडी मिलेगी?

नहीं, सब्सिडी 3 kW पर ही ₹78,000 पर कैप हो जाती है; उससे बड़े सिस्टम पर अतिरिक्त सब्सिडी नहीं मिलती।

DISCOM फीज़िबिलिटी अप्रूवल में कितना समय लगता है?

आमतौर पर 7 से 30 दिन, राज्य और DISCOM की कार्यक्षमता के अनुसार अलग-अलग।

क्या विदेश में रहने वाले भारतीय अपने परिवार के लिए आवेदन करवा सकते हैं?

हां, यदि घर और बिजली कनेक्शन भारत में परिवार के किसी सदस्य के नाम पर है, तो वही सदस्य भारत से आवेदन पूरा कर सकता है — प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है।

अंतिम विचार

PM Surya Ghar Yojana सिर्फ एक सब्सिडी स्कीम नहीं, बल्कि आपके घर को एक छोटे पावर स्टेशन में बदलने का मौका है। सही दस्तावेज़, सही वेंडर और थोड़ी सी सावधानी के साथ, कोई भी पात्र परिवार 45-90 दिनों के भीतर अपनी छत पर सोलर पैनल लगवा सकता है और आने वाले 25 सालों तक बिजली के बिल से लगभग मुक्ति पा सकता है।

अगर आपने अभी तक आवेदन नहीं किया है, तो सबसे पहला कदम है — अपने पिछले 12 महीनों के बिजली बिल का औसत निकालना और pmsuryaghar.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करना। बाकी की प्रक्रिया इस गाइड में बताए गए स्टेप्स के अनुसार आसानी से पूरी हो जाएगी।


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